Sunday, August 31, 2014

AN INVITATION

10th biennial National Convention of National Alliance of People’s Movements

Politics of Development and Social Justice Today

31st October, 1st -2nd November, Pune

Dear Saathis,

20 years ago, in response to the rising inequality, oppression and destruction in the name of development, country’s progressive individuals and sangathans came together and envisioned the birth of the National Alliance of People’s Movements. There was enthusiasm, hope and determination to struggle towards establishing peace, justice and truly participatory democracy. Over the last two decades, we have been a part of the various people’s movements and struggles; there have been victories and there have been setbacks. Despite the changing times which are defined by neo-liberal policies and supported unanimously by all political parties, and having damaging impacts, people’s movements have continued to challenge, propose alternatives and pushed the boundaries of ideas and vision for a just society.  We witness that the rights of the people are increasingly curtailed, natural resources being appropriated and rule of law deliberately violated to undermine people’s movements. However, our struggles have together built increased awareness about such draconian policies, as a result of which exploitation and injustice can no longer be justified under the rubric of nationalism. People are resolutely fighting against the violations of their rights and no longer need outside instigation. Every village, every basti, every city has people who are raising their voices against capitalist and oppressive forces. But on the other hand, religious fanaticism and violence and discrimination based on gender and caste are raising their ugly heads. On one hand the ruling classes are keen on changing the pro-people laws enacted by the Parliament and rights bestowed by the Constitution and on the other hand, it is trying to take political advantage of the existing exploitation and violence to exercise its continuing control over society.   

As we complete two decades, we feel the need to revisit those same questions we started with, in today’s context. We invite you to NAPM’s 10th biennial National Convention on October 31st, November 1-2nd at Rashtra Seva Dal, Pune, Maharashtra. More details will follow but this is the intimation so that you can block the dates and make arrangements for the travel. As it is the festival season, it would be good if you could make your bookings in advance.

We hope you will be part of this gathering so that with the same enthusiasm, we can move forward together and collectively understand and strategize the future course of action to fight the illusion that is being spun in the name of development but is in fact only increasing inequality and leading to destruction of natural resources. Working towards the notion of alternative development and building equitable society is our aim and we are determine to reach this end.  


In anticipation to seeing you all,

Medha Patkar, Prafulla Samantara, Dr. Sunilam, Suniti SR, Arundhati Dhuru, Gabriele Dietrich, C R Neelakandan, P Chennaiah, Ramakrishnam Raju, Saraswati Kavula, Sister Celia, Vilas Bhongade, Suhas Kolhekar, Anand Mazgaonkar, Krishnakant, Kamayani Swami, Mahendra Yadav, Bhupender Singh Rawat, Rajendra Ravi, Vimal Bhai, Meera, Madhuresh, Kanika.

Contact: Suniti SR :09423571784, Kanika :9818823252, Madhuresh: 9818905316


आमंत्रण
जन आन्दोलनों का राष्ट्रीय समन्वय का दसवां द्विवार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन
आज के दौर में विकास और सामाजिक न्याय
अक्टूबर ३१, नवम्बर १  २, पुणे

बीस साल पहले देश के संघर्षशील और प्रगतिशील साथियों और संगठनों ने देश में बढती गैरबराबरी, शोषण और विकास के नाम पर हो रहे विध्वंस को देख कर एक साथ मिलकर उस दिशा को बदलने के लिए जन आन्दोलनों के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) की परिकल्पना की थी. जोश था, उमंग थी, संघर्ष करने की चाहत थी और था संगठन ताकि देश में शांति, न्याय और लोकतंत्र का राज स्थापित हो सके अंतिम जन के लिए. इन दो दशकों में अनेकों संघर्षों में हम साथ चले हैं, जीते हैं, कभी हार का भी सामना करना पड़ा है, लेकिन इन सब में जन मुद्दों को आगे ही बढाया है. समय बदला है, और बड़े तेजी से बदल रहा है. आज नव उदारवादी नीतियों को भी दो दशक से ज्यादा हो चुके हैं और देश में इन नीतियों का भयावह प्रभाव भी दिख रहा है. सभी राजनैतिक पार्टियों इन नीतियों के बारे में एकमत है.
जनता के हकों को आज तेजी से रौंदा जा रहा है, प्राकृतिक संसाधनों का बेतहाशा दोहन हो रहा है, शोषण, अन्याय का बोलबाला हो रहा है, लेकिन जन संघर्षों के बदौलत जनता की समझ भी परिपक्व हुई है. आज शोषण और अन्याय को देश हित में या राष्ट्रवाद के नाम पर जायज नहीं ठहराया जा सकता. जनता उठ खड़ी होती है अपने हकों के लड़ने के लिए. आज बाहर से किसी को आकर उद्वेलित करने की जरूरत नहीं है, गाँव गाँव, क़स्बा क़स्बा, शहर शहर, हर जगह लोग अपने हकों की लडाई के लिए पूंजीवादी और दमनकारी ताकतों के खिलाफ खड़े हैं. लेकिन दूसरी ओर आज धार्मिक उन्माद तेजी से सर उठा रहा है, महिलाओं के प्रति हिंसा बढ़ रही है तो जातिगत हिंसा, भेदभाव और पक्षपात भी उसी भांति बाद रही है. जन विरोधों के कारण ही एक तरफ आज शासक वर्ग संविधान और संसद के द्वारा बनाये गए जन पक्षीय कानूनों को बदलने के लिए आमदा है तो दूसरी तरफ वह समाज में मौजूदा विषमता और हिंसा का राजनैतिक फायदा उठा कर समाज में अपनी पकड़ बनाई रखते है.
आज दो दशक बाद जरूरत महसूस होती है, उन्ही सवालों को आज के दौर में देखने की, जिसे लेकर हम चले थे. हम आपको आमंत्रित करते हैं, NAPM के दशवें दिवार्षिक राष्ट्रीय अधिवेशन में अक्टूबर ३१, नवम्बर १-२ को पुणे में. अगले कुछ दिनों में और विस्तृत जानकारी दी जायेगी, लेकिन यह पहली जानकारी हम आपको दे रहे हैं ताकि आप तारिख नोट कर लें और यात्रा की टिकट भी समय रहते कर लें. यह समय त्योहारों का है, तो बेहतर होगा अगर ट्रेन का रिजर्वेशन पहले कर लें.
आशा है आप जरूर इस महत्वपूर्ण समागम में जरूर शामिल होंगे, ताकि हम फिर उसी उत्साह के साथ मिलकर आगे के संघर्षों की भावी रूप रेखा तय कर सकें और विकास के नाम पर जो मायाजाल बुना जा रहा है जिससे सिर्फ और सिर्फ गैरबराबरी बढ़ रही है और प्राकृतिक  संपदाओं का नाश हो रहा है, उसे हम रोकने में कामयाब हो सके. वैकल्पिक विकास की अवधारणा, और एक साम्यवादी समाज की संरचना ही हमारा लक्ष्य है और उसे निर्मित करने के लिए हम कटिबद्ध हैं.

सविनय आपसे मिलने की अपेक्षा में,

मेधा पाटकर, प्रफुल्ला सामंतरा, डॉ. सुनीलम, सुनीति सु र, अरुंधती धुरु, गब्रिएले दिएत्रिच, सी आर नीलकंठन, पी चेन्निया, सिस्टर सीलिया, विलास भोंगाड़े, सुहास कोल्हेकर, आनंद माजगओंकर, कृष्णकांत, कामायनी स्वामी, महेंद्र यादव, भूपेंदर सिंह रावत, राजेंद्र रवि, विमल भाई, मीरा, मधुरेश कुमार, कनिका

संपर्क : सुनीति सु र : 09423571784 कनिका : 9818823252 मधुरेश : 9818905316


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